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Showing posts from May, 2021

लुम्बिनी Lumbini : जहां भगवान बुद्ध ने लिया जन्म

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लुम्बिनी, बौद्ध धर्म के चार तीर्थ स्थलों में से एक है. सिद्धार्थ गौतम का जन्म तीर्थयात्रियों में से भारतीय सम्राट अशोक थे, जिन्होंने वहां अशोक स्तंभ स्मारक बनाया था। खंभे पर शिलालेख नेपाल में सबसे पुराना है। इतिहास प्रेमियों और बौद्धों के लिए लुम्बिनी एक महत्वपूर्ण जगह है । यहां पर बोधी वृक्ष झंडे में ढंका एक पेड़ है जो लुंबिनी तालाब के बगल में स्थित है । लोग प्रार्थना करने के लिए यहां आते हैं। वे प्रति इच्छा पेड़ के चारों ओर एक झंडा बांधते हैं। यह जगह बहुत शांतिपूर्ण है और लोग आम तौर पर वहां ध्यान करते हैं। मायादेवी तालाब, माया देवी मंदिर परिसर के अंदर स्थित, वह जगह है जहां बुद्ध की मां उसे जन्म देने से पहले स्नान करती थीं। यह भी माना जाता है कि सिद्धार्थ गौतम का पहला स्नान भी यहां हुआ था। लुंबिनी संग्रहालय, मौर्य और कुशान काल की कलाकृतियों को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में लुम्बिनी को चित्रित करने वाली दुनिया भर से धार्मिक पांडुलिपियों, धातु मूर्तियों और टिकटें हैं। लुंबिनी इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एलआईआरआई), लुंबिनी संग्रहालय के सामने स्थित है, सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और ध...

रूपये की समस्या - The Problem of Rupee

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डॉ भीमराव आंबेडकर ने अपनी पी. एच. डी. की थीसिस में बताया था कि कैसे अचानक ही भारत के रूपये का मूल्य एकदम गिर गया था और आज तक वह उठ नहीं पाया। क्या थी तब की और आज की समस्या? पढ़ें पूरा लेख।  डॉ भीमराव आंबेडकर जैसे विद्यावान लोग विश्व में विरले ही होते हैं। एक तरफ उन्होंने भारत का संविधान लिखा और दूसरी तरफ वह एक महान अर्थशास्त्री भी थे। अपने विद्यार्थी काल में ही उन्होंने अपनी पी. एच. डी. की थीसिस “रूपये की समस्या (उद्भव और समाधान)” (The Problem of Rupee) में रूपये की समस्या के बारे में लिख कर तब की ब्रिटिश सरकार को हैरान कर दिया था। उनकी वह थीसिस उत्तम दर्जे का अर्थशास्त्र का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अफ़सोस कि भारत में उसे बहुत कम लोगों ने पढ़ा है, अन्यथा उसे भारत की एक मत्वपूर्ण कृति माना जाता। परन्तु उन्होंने जो लिखा था उस पर विदेशों में शोध हुआ और अमेरिका जैसे उन्नत राष्ट्र के लोगों को वह सब बातें बाद में समझ में आई जो कि उन्होंने आज से लगभग सौ साल पहले लिखी थी। पर अफ़सोस कि भारत के लोग अभी तक उन तथ्यों को नहीं समझे हैं और उन्हें स्कूल अथवा कालेजों में पढ़ाया भी नहीं जाता। संक्षिप्त...